दूरदर्शन के गोल्डन पीरियड का जब भी जिक्र होता है, बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' का नाम सबसे ऊपर आता है। इस धारावाहिक के हर पात्र ने दर्शकों के मानस पटल पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं में से एक प्रभावशाली किरदार था पांडवों की माता 'कुंती' का, जिसे अभिनेत्री नाजनीन ने बड़ी ही शालीनता और संजीदगी के साथ पर्दे पर उतारा था, लेकिन पर्दे पर ममता की मूरत दिखने वाली इस अभिनेत्री का वास्तविक जीवन और फिल्मी सफर संघर्षों, विवादों और एक टीस से भरा रहा।
एयर होस्टेस बनने का सपना और मजबूरी का ग्लैमर
नाजनीन का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था और वे कभी भी अभिनय की दुनिया में कदम नहीं रखना चाहती थीं। उनका बचपन से ही सपना आसमान छूने का था और वे एक एयर होस्टेस बनना चाहती थीं। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनकी माता को एयर होस्टेस का पेशा असुरक्षित लगता था, जिसके कारण उनके दबाव में नाजनीन ने ग्लैमर की दुनिया की ओर रुख किया। उन्होंने 1972 में फिल्म 'सारेगामापा' से अपनी शुरुआत की, लेकिन बॉलीवुड की चमक-धमक उनके लिए उतनी सुखद साबित नहीं हुई जितनी दूर से दिखाई देती थी।
टाइपकास्ट होने का दर्द और बिकिनी विवाद
नाजनीन ने अपने करियर में लगभग 22 फिल्मों में काम किया, जिनमें 'कोरा कागज', 'चलते-चलते' और 'हैवान' जैसी फिल्में शामिल थीं। बेहतरीन अदाकारा होने के बावजूद, फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें मुख्य भूमिकाओं के बजाय 'बहन' या 'सहेली' के साइड रोल्स में ही सीमित रखा। खुद को इस 'सीधी-सादी' छवि से बाहर निकालने और लीड एक्ट्रेस की दौड़ में शामिल होने के लिए उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया।
क्यों उल्टा पड़ा बिकिनी पहनने का दांव?
1976 की फिल्म 'चलते-चलते' में उन्होंने बिकिनी पहनकर पर्दे पर आग लगा दी। उस दौर में जब बोल्डनेस को सहजता से नहीं लिया जाता था, नाजनीन का यह कदम सनसनीखेज बन गया। हालांकि यह दांव उन पर उल्टा पड़ गया। बोल्ड इमेज अपनाने की कोशिश ने उन्हें लीड रोल तो नहीं दिलाए, बल्कि उनकी छवि एक बी-ग्रेड एक्ट्रेस की बना दी। काम की कमी और आर्थिक तंगी के चलते उन्हें कई ऐसी फिल्मों में काम करना पड़ा जिन्होंने उनके करियर को ढलान की ओर धकेल दिया।
'कुंती' बनकर मिली घर-घर में पहचान
जब फिल्मों से उम्मीदें खत्म होने लगी थीं, तब 'महाभारत' उनके जीवन में एक संजीवनी बनकर आया। कुंती के किरदार में उनकी सादगी और अभिनय की गहराई ने उन्हें रातों-रात पूरे देश का चहेता बना दिया। लोग उन्हें उसी सम्मान के साथ देखने लगे, जिसकी वे हमेशा से हकदार थीं। लेकिन 'महाभारत' की इस अपार सफलता के बाद भी उन्हें इंडस्ट्री में वह मुकाम नहीं मिल सका जो एक सफल कलाकार को मिलना चाहिए।
गुमनामी की चादर और रहस्यमयी जीवन
आज के समय में जहां पुराने कलाकार सोशल मीडिया या रियलिटी शोज़ के जरिए चर्चा में बने रहते हैं, वहीं नाजनीन गुमनामी के अंधेरे में खो चुकी हैं। वे कहां हैं, किस हाल में हैं, इसके बारे में फिल्म जगत के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। एक समय में करोड़ों दिलों पर राज करने वाली 'कुंती' आज चकाचौंध से मीलों दूर शांत जीवन जी रही हैं या संघर्ष कर रही हैं, यह एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है। नाजनीन की कहानी मनोरंजन जगत की उस कड़वी सच्चाई को बयां करती है, जहां कभी-कभी एक गलत फैसला या वक्त की मार एक टैलेंटेड कलाकार को इतिहास के पन्नों में धुंधला कर देती है। नाजनीन कभी ऋषि कपूर की पत्नी नीतू कपूर की बेस्ट फ्रेंड थीं, लेकिन अब उन्हें पर्दे पर देखे हुए 37 साल बीत चुके हैं।
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